भगवान की उपासना में लगे वह शिव और जो संसार की वासना में लगे वह शव है पंडित सिद्धशरण पाठक
भारत सागर न्यूज/देवास। गुरु टेकचंद दर्जी समाज धर्मशाला सदाशिव नगर मोती बंगला में चल रही श्रीमद् भागवत रूपी ज्ञान गंगा में सैकड़ो लोग रोज डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं। श्रीमद्मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर आकर्षण का केन्द्र रहे इस सृष्टि के नियंता भगवान शिव पार्वती। व्यास पीठ से भगवताचार्य पंडित सिद्धशरण पाठक ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि शिव पार्वती का विवाह मानो संपूर्ण सृष्टि के नयन लालायित हो उठे इस दृश्य को देखने के लिए।
अद्भुत लीला है प्रभु की। नारायण तो जीवन सौंदर्य के अधिपति है। वे स्वयं भी सुंदर है, उनकी अर्धांगिनी लक्ष्मी जी भी वैभव समृद्धि और सौंदर्य की अधिष्ठात्री है, जीव जगत का पालन हार है।पर शिव समस्त विश्व के जीव जंतु चर अचर ,सुर असुर,देव दानव, के रक्षक है और माता पार्वती जगदंबा हैं। इस पृथ्वी पर नारी के सारे स्वरुप उन्हीं के हैं। पर वे सुकोमल भी है, सौंदर्य युक्त भी है, तपस्विनी भी है और हैं शिव के प्रति समर्पिता। पूर्व जन्म में यही दक्ष की कन्या सती थीं इनकी कथा विस्तार से आचार्य पंडित सिद्ध शरण पाठक ने अत्यन्त मनोहारी ढंग से सुनाई।
श्रोता गण सुनकर भावविभोर हो गए। उन्होंने आगे कहा कि सती का दूसरा जन्म पार्वती के रूप में हिमालय के यहां हुआ और कठोर तपस्या के फल स्वरुप उन्होंने पुनः शंकरजी को अपना पति माना। तपस्या के फल स्वरुप शिव से ही शिव को मांग लिया। विवाह में बहुत अवरोध उत्पन्न हुए पर अखिर में सभी देवताओं के आशीर्वाद में शिव पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। यह आकर्षक और लुभावना दृश्य सभी को आनंदित कर गया। अन्य प्रसंग भी पाठक जी द्वारा अत्यन्त प्रभाव पूर्ण ढंग से व्याख्यायित हुए। कथा का सौंदर्य अनुपम है जो भगवान की उपासना में लगे हैं शिव है, जो संसार की वासना में लगे हैं वह शव है।
आयोजक मंडल के शिवनारायण परिहार, प्रद्युम्न,आशा परिहार, आयुषी,एवं अचलूखेड़ी खेड़ी के समस्त परिवार ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना कर महाआरती की। सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया। कथा का आयोजन प्रतिदिन 3 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।




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