शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगोद में पत्र लेखन कला पर विशेष व्याख्यान साहित्यकार रवींद्र वर्मा ने बांटे मुफ़्त पोस्टकार्ड
भारत सागर न्यूज/देवास। आधुनिक डिजिटल युग में धीरे-धीरे ओझल होती पत्र लेखन की परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जामगोद (देवास) में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नवाचारी साहित्यकार एवं विज्ञान शिक्षक रवींद्र वर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों और विद्यालयीन स्टाफ के समक्ष पत्र लेखन की विलुप्त होती कला और उसकी प्रासंगिकता विषय पर अपना प्रेरक भाषण दिया।
पत्र लेखन की सादगी और उसकी संवेदनाएं-
अपने संबोधन में रवींद्र वर्मा ने कहा कि आज के व्हाट्सएप और ईमेल के दौर में हस्तलिखित पत्रों की सादगी, आत्मीयता और उनके पीछे छिपी भावनाएं कहीं खो सी गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पत्र केवल संदेश भेजने का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक ऐसा दस्तावेज है जिसे वर्षों तक सहेज कर रखा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित शिक्षकों से आग्रह किया कि वे इस अमूल्य कला और इसके पीछे की संवेदनाओं को जीवित रखने का संकल्प लें।
वर्मा ने विद्यार्थियों को पत्र लेखन की तकनीकी बारीकियों से भी अवगत कराया। उन्होंने पत्रों के मुख्य प्रकारों-औपचारिक (फॉर्मल) और अनौपचारिक (इनफार्मल)के अंतर को सहज भाषा में समझाया। डिजिटल संदेश क्षणिक होते हैं, लेकिन हाथ से लिखा पत्र दिल से निकलता है और स्मृतियों में सदा अमर रहता है। इस कला को जीवित रखना हमारी सांस्कृतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।
सत्र को केवल सैद्धांतिक न रखते हुए, रवींद्र वर्मा ने विद्यार्थियों और सभी शिक्षकों में मुफ़्त पोस्टकार्ड का वितरण किया। उन्होंने सभी को अपने परिजनों या मित्रों को एक हस्तलिखित पत्र लिखकर इस मुहिम की शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहित किया । पोस्टकार्ड पाते ही विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे और उनमें पत्र लिखने को लेकर एक अनोखा उत्साह देखा गया। विद्यालय परिवार एवं प्राचार्य ने वर्मा की इस अनूठी और प्रेरणादायी पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस अवसर पर संस्था शा. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगोद देवास की प्राचार्य समंदर सिंह परमार , स्टाफ राजाराम बामनिया , विमलेश तोर्निया , प्रतीक्षा पंड्या , श्री मिश्रा आदि सदस्य उपस्थित रहे।




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