फसल बीमा राशि नहीं मिलने से किसानों का फूटा गुस्सा, 150 से अधिक किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन 15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो चक्काजाम की चेतावनी

 




भारत सागर न्यूज/देवास। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तीन वर्षों से बीमा राशि नहीं मिलने से नाराज कन्नौद ब्लॉक के किसानों का आक्रोश मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में देखने को मिला। कन्नौद क्षेत्र के मुहाई, भिलाई, नादौन, डाबरी एवं कोलारी बड़ा खेत गांवों के 150 से अधिक किसान नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और सामूहिक आवेदन सौंपकर शीघ्र फसल बीमा राशि दिलाने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चक्काजाम कर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। 




किसानों ने आवेदन में बताया कि उन्होंने वर्ष 2023, 2024 और 2025 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अपनी फसलों का विधिवत बीमा कराया था। इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी फसलों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन आज तक इन गांवों के किसी भी किसान को बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। जबकि आसपास के अन्य गांवों के किसानों को तीनों वर्षों का बीमा क्लेम मिल चुका है। किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित बैंक, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सेटेलाइट सर्वे के आधार पर बीमा का निर्धारण किया गया है, जिसमें उनके गांवों को छोड़कर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित गांवों को बीमा राशि प्रदान कर दी गई। 




इससे क्षेत्र के किसान खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कन्नौद एवं तहसीलदार कन्नौद को भी कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बीमा राशि नहीं मिलने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। खेती की लागत बढ़ने और लगातार नुकसान के कारण कई किसान कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। किसानों ने कलेक्टर से मांग की कि उनके सभी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराकर जल्द से जल्द फसल बीमा की राशि का भुगतान कराया जाए। साथ ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित संस्था की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को न्याय मिल सके। जनसुनवाई के दौरान किसानों ने प्रशासन से स्पष्ट कहा कि यदि 15 दिनों में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम सहित व्यापक आंदोलन करेंगे।



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