42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए प्राचार्य अनिल सोलंकी विद्यालय परिवार ने समारोह के साथ दी विदाई
भारत सागर न्यूज/देवास। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगावदा में पदस्थ प्राचार्य अनिल सोलंकी अपनी 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। विद्यालय परिवार ने विदाई समारोह आयोजित कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त सहायक संचालक गेरूलाल व्यास, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी हीरालाल खुशाल, हरिसिंह भारतीय, पूर्व प्राचार्य विजय श्रीवास्तव, सुंदरलाल परमार, उर्मिला शर्मा, राजश्री काले, राजकुमार चंदन थे। अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी राजीव सूर्यवंशी ने की।
सर्वप्रथम प्राचार्य सोलंकी का शाल श्रीफल, प्रशस्ति पत्र व पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। पूर्व सहायक संचालक व्यास ने सोलंकी सर की सेवा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्होंने 5 दिसंबर 1984 से सहायक शिक्षक के पद पर अपनी ईमानदारी व कर्तव्य के साथ अध्यापन कार्य की शुरुआत की। उसके बाद निरंतर आगे बढ़ते हुए माध्यमिक विद्यालय क्रमांक एक देवास, व्याख्याता के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरोठा, शासकीय हाई स्कूल चौबापिपल्या, उत्कृष्ट विद्यालय टोंकखुर्द, शासकीय मॉडल स्कूल देवास प्राचार्य और वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगावदा से 31 जुलाई को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी खुशाल एवं भारती सर ने भी सोलंकी सर के किए गए कार्यों व सेवाओं के बारे में विस्तार से चर्चा कल प्रकाश डाला।
जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यवंशी ने भी अपने उद्बबोधन में उनके साथ किए गए कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने विद्यालयीन कार्यों के साथ-साथ उत्कृष्ट विद्यालय में माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित परीक्षाओं से संबंधित समस्त दायित्व का भी निर्वहन किया। हमेशा विद्यालय के गरीब बच्चों की परेशानियों को देखते हुए हर प्रकार से मदद की। साथ ही हर कार्य को लगन मेहनत ईमानदारी के साथ समय सीमा के अनुसार किया।
सोलंकी ने भी अपनी 42 वर्षों की सफलता का श्रेय विद्यालय परिवार व बच्चों के पालकों-अभिभावकों को देते हुए कहा कि इनके सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त की। इस अवसर पर अनीता श्राफ, वैशाली तावसे, मीना शिवहरे, उमा भटेले, सुनील पटेल, विजय पटेल, सलीम खान, कृष्णमूर्ति शिवहरे, सहित विद्यालय परिवार उपस्थित रहा। संचालन अशोक बुनकर ने किया। आभार शिक्षक बसंत व्यास ने माना।




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