राखी बांध बहनों ने लिया वचन—जेल से बाहर आकर कभी अपराध की राह पर नहीं जाना, परिवार के साथ बसाना खुशियों का संसार
भारत सागर न्यूज/देवास। जेल की ऊंची दीवारें और लोहे की सलाखें उस समय मानो भाई-बहन के अटूट प्रेम के आगे छोटी पड़ गईं, जब जिला जेल देवास में रक्षाबंधन का पर्व भावुक माहौल में मनाया गया। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचीं 150 से अधिक बहनों ने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इस दौरान कई ऐसे भावुक क्षण भी सामने आए, जब भाई-बहन की आंखें नम हो गईं। जिला जेल अधीक्षक विद्या भूषण प्रसाद ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर बंदियों की बहनों को अपने भाइयों से प्रत्यक्ष मुलाकात कर राखी बांधने की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। जेल प्रशासन द्वारा मानवीयता और संवेदनशीलता के साथ बहनों एवं परिवारजनों के प्रवेश की व्यवस्था की गई। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले रक्षाबंधन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बहनें जेल पहुंचीं। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और उनके सुखद भविष्य की कामना की। इस दौरान कई मुस्लिम बहनें भी जेल पहुंचीं और अपने भाइयों को रक्षासूत्र बांधकर भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
रक्षाबंधन के दौरान सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिले, जब बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के साथ उनसे यह वचन लिया कि जेल से बाहर आने के बाद वे दोबारा किसी गलत कार्य या अपराध की राह पर नहीं जाएंगे। बहनों ने भाइयों से कहा कि वे परिवार के साथ शांति, सम्मान और खुशहाली से जीवन बिताएं। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कापरेटिव सोसायटी के माध्यम से मिठाई एवं नारियल की व्यवस्था की। वहीं राखी बांधने के लिए बहनों को पूजा की थाली भी उपलब्ध कराई गई। जिला जेल अधीक्षक विद्या भूषण प्रसाद ने कहा कि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना जेल प्रशासन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक पर्व पर बंदियों को परिवार और अपनों का स्नेह मिले, इसके लिए प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि परिवार का अपनापन और बहनों का विश्वास बंदियों को अपराध से दूर होकर बेहतर जीवन की ओर लौटने की प्रेरणा दे सकता है। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने जेल की चारदीवारी के भीतर भी प्रेम, अपनत्व और सकारात्मक सोच का संदेश पहुंचाया। राखी की डोर ने जहां भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत किया, वहीं कई बंदियों के लिए यह दिन नई शुरुआत और अपराध की राह छोड़कर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने का संकल्प भी बन गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जेल उपाधीक्षक अनिल दुबे सहित जेल के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।



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