जब तक आध्यात्मिक शक्ति जागृत है देश कभी पराजित नहीं हो सकता महर्षि अरविन्द जन्मोत्सव में अरविन्द के योग एवं दर्शन पर कार्यक्रम आयोजन
भारत सागर न्यूज/देवास। अरविन्द सोसायटी पुदुच्चेरी, के देवास केंद्र द्वारा आयोजित अरविन्द जन्मोत्सव कार्यक्रम स्थानीय कलश गार्डन में आयोजित हुआ। अरविन्द के सम्पूर्ण योग मय जीवन पर आधारित विचारों को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता निवृत्तमान सरकार्यवाह एवं सदस्य कार्यकारी मण्डल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सुरेश भैया जोशी ने प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि देवास विधायक गायत्री राजे पवार, एवं महंत रितेश बैरागी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का प्रारंभ पौधारोपण एवं अरविन्द तथा उनकी आध्यात्मिक सहयोगी माँ के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन एवं दीपप्रज्वलन के साथ हुआ।
अरविन्द का आवाहन एवं मन्त्र हुआ। अतिथि स्वागत पश्चात अरविन्द सोसायटी म. प्र.अध्यक्ष मनोज शर्मा ने अरविन्द का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। जन्म 15 अगस्त 1872 को कलकत्ता में हुआ आपने बताया कि, अरविन्द प्रखर व्यक्तित्व के धनी तथा अत्यंत मेधावी छात्र थे। ब्रिटेन से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे पिता के कहने पर प्रशासनिक परीक्षा में शामिल हुए, उत्तीर्ण होकर भी अंग्रेजो की नौकरी नहीं की। क्रन्तिकारी विचारों के साथ अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी 1910 मे पुदुच्चेरी आ गए तथा पूरा जीवन योग को दे कर समाज को मार्गदर्शन देने लगे। यहाँ आश्रम की स्थापना की माँ जो फ्रांसिसी थी उनकी आध्यात्मिक सहयोगी बनी। अपने मुख्य उद्बोधन में सुरेश भैया जोशी ने अरविन्द द्वारा रचित साहित्य के महत्वपूर्ण अंशो को उद्धरित करते हुए उनके विचारों को आधुनिक भारत के निर्माण में सदैव सहायक बताया। अरविन्द के विचार आजादी मिलने के समय से इतने दूरदर्शी थे कि, वर्तमान देश काल परिस्थिति में भी पूर्ण मार्गदर्शन देते हैं। शांति का सन्देश वही देश दे सकता है जो शांति की रक्षा कर सके। अरविन्द का सूत्र वाक्य सारा जीवन ही योग है विवेकवान व्यक्तित्व का निर्माण करता है. एक देश का भाव रहेगा तब तक भारत प्रबल रहेगा। आपने बताया कि बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के स्थान पर सर्व जन हिताय सर्वजन सुखाय भारत की मूल संस्कृति में समाहित है। अरविन्द कहते थे हमें अपने विचारों सिद्धांतो परंपराओं पर चलना है यही हमें आत्मनिर्भर बनाते है, इसी सन्दर्भ में भैयाजी ने कहा कि, अधिकारों की चर्चा ज़्यादा होती है कर्तव्यों की कम परन्तु यदि एक राजा अपने कर्तव्य पूर्ण करता है तो जनता के अधिकार सुरक्षित रहते है।
अतः कर्तव्य चर्चा के केंद्र में रहना चाहिए। आध्यात्मिक दर्शन को भारत की महान शक्ति बताते हुए कहा कि, जब तक आध्यात्मिक शक्ति जागृत है भारत कभी पराजित नहीं हो सकता. यह शक्ति सबके प्रति आदर भाव देती है यह ईश्वरीय शक्ति भारत को सुरक्षा देती है. वन्दे मातरम पर भैयाजी जोशी ने कहा कि, भारत भूमि का टुकड़ा नहीं है यह एक महान शक्ति है यहाँ व्याप्त शक्ति, विद्या एवं लक्ष्मी की पूजा हम करते हैँ भारत माँ को इसी स्वरुप में देखतें है. समाज के प्रत्येक वर्ग से समाज सेवी जन बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भैयाजी जोशी द्वारा वर्णित श्री अरविन्द के विचारों को गंभीरता के साथ सुनते रहे.विधायक गायत्री राजे पवार ने कहा कि अरविन्द के विचार हमारे लिए प्रेरणा पूँज हैं। देवास के महाराज तुकोजीराव तृतीय सन 1930 में तत्कालीन पांडिचेरी गए फिर वहीं स्थित आश्रम में अपना अपना आध्यात्मिक जीवन व्यतीत किया। देवास का रियासतकालीन इतिहास अरविन्द आश्रम से जुड़ा है। महंत रितेश बैरागी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम में निकट भविष्य में होने जा रही 51 शक्तिपीठ स्थल की स्थापना की जानकारी शक्तिधाम न्यास के सचिव राकेश शर्मा ने देते हुए पीपीटी प्रजेंटेशन दिया। अरविन्द सोसायटी उज्जैन के अध्यक्ष विभाष उपाध्याय ने कार्यक्रम सम्बन्धी आवश्यक मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का समापन धनराज परमार एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत संगीतमय वन्देमातरम राष्ट्रगीत से हुआ।कार्यक्रम का संचालन अरविन्द त्रिवेदी ने किया आभार मिलिंद सोलंकी ने माना। इस अवसर शहर के ओद्योगिक, सामाजिक, धार्मिक,महिला संगठन, खेल, व्यापार, राजनितिक, एवं प्रशासनिक वर्ग से जुड़े नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। गार्डन का सभास्थल पूरी तरह भर गया बाहर प्रांगण में भी स्क्रीन लगा कर बैठक व्यवस्था की गयी। अरविन्द सोसायटी देवास के कार्यकर्त्ताओं ने कार्यक्रम की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया।




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