कलेक्टर के निर्देश की ऐसे निकली हवा, क्या सीएम के क्षेत्र में ऐसे होगी कार्यवाही ?

SDM साहब एसी रूम में बैठे रहे, तहसीलदार, नायब तहसीलदार,CMO चेहरा देख कर तिलक करते रहे।

सीहोर/रायसिंह मालवीय

मुख्यमंत्री ने भूमाफिया, सूदखोरों, अवैध अतिक्रमण पर सख्त चेतावनी दी असर भी देखने को मिला पूरे प्रदेश में और कई बड़े बड़े लोगो के अवैध कब्जे को जेसीबी मशीन से ढहाया गया । फरमान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का था तो लाज़मी था मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी अफसर नंबर बढ़ाने से कहा चुकने वाले थे ।

लिहाजा सीहोर मुख्यालय से अवैध कालोनियों ,अवैध अतिक्रमण से शुरू हुई यह कार्यवाही इछावर भी पहूंची ।लेकिन सीहोर की आष्टा तहसील में आते आते यह मुहिम अधिकारियों के आगे ढीली पड़ गई । एक तो देर से अवैध रूप से वर्षो से सरकारी भूमियों पर कब्जा जमाए बैठे इन भूमाफिया पर कार्यवाही शुरू हुई वो भी ढाक के तीन पात निकली 

SDM साहब दफ्तर से बाहर नहीं निकले,बाकियों ने चेहरा देख का तिलक किया 

शनिवार को आष्टा के भूमाफिया, अवैध अतिक्रमणकारियो पर शुरू हुई कार्यवाही के दौरान पूरे दिन आष्टा एसडीएम कार्यवाही के दौरान कई भी दिखाई नही दिखाई दिए वही जानकारी प्राप्त हुई कि अनुविभागीय अधिकारी विजय मंडलोई अपने दफ्तर से इस पूरी कार्यवाही की मॉनिटरिंग कर रहे थे लेकिन साहब भूल गए की ऐसी कार्यवाही के समय रुतबेदार अफसरों को होना कितना जरूरी होता है और इसका खामियाजा जनता को तहसीलदार, नायब तहसीलदार, CMO ने मूर्ख बनाकर दिया।

छोटे- मोटे ओटले भी तोड़े, रसूखदारो के सामने आवाज भी नही निकली, अब एसडीएम साहब तो अपने दफ्तर में बैठे

बाकी तहसीलदार रघुवीर मरावी, नायब तहसीलदार अंकिता वाजपेयी, CMO नंदकिशोर परसनिया ने जो किया अपनी मर्जी का किया । इन तीनो अफसरों ने जनता को मूर्ख बनाने में कोई कसर नही छोड़ी या कहे साथ चल रही मीडिया का भी इन्हें डर नहीं दिखाई दिया और भोलेभाले सीधे साधे दुकानदारों के छोटे मोटे अतिक्रमण को बड़ी ही सख्ती से हटवाया और जुर्माना भी वसूला।

लेकिन जब किसी रसूखदार ,पावरफुल, राजीनितिक या अन्य किसी ताकतवर के बड़े अवैध अतिक्रमण के बात आई तो यह तीनों अफसरों ने अपनी सख्ती को दिखाना जरूरी नही समझा। कुल मिलाकर प्रशासन के यह सभी नुमाइंदे भेदभावपूर्ण कार्यवाही का नेतृत्व करते हुए चले।

हाल तो यह तक देखने को मिले की छोटे मोटे दुकानदार के बाहर निर्माण कार्य का सामान को भी जब्त कर लिया और जब बात रसूखदारो के अतिक्रमण की आई यह तीनों अफसर अपने कर्तव्यों को मुह छिपाकर  जनता के साथ छल करते हुए निकल गए।

और यह सब पूरा माजरा लोग देखते रहे और लोग इस कार्यवाही का दबी जुबान में विरोध करते रहे लेकिन खुलकर विरोध नही कर सके। करते भी क्यो जब सरकारी नुमाइंदे ही भेदभाव करेगे तो फिर न्याय के लिये किससे आस रखे। 

अवैध कालोनियों,मिलावट खोर भी नही दिखते साहब को

शहर में डेड दर्जन से ज्यादा अवैध कालोनिया है जो बिना किसी परमीशन के कृषि भूमि खेतों में काट दी गई है नही इन कालोनी मालिकों के पास अनुविभागीय अधिकारी द्वारा

विकास अनुमति है नाही कॉलोनाइजर का लाइसेंस, रेरा में पंजीयन है ?

इसके बाद भी शहर में अवैध रूप से कालोनियों का व्यापार फल फूल रहा था। लेकिन फिर भी अवैध कालोनियां काटी जा रही है सिर्फ डायवर्सन करवाकर क्योंकि डायवर्सन सिर्फ भूमिका का होता है लेकिन भूखंड काटने के लिए नहीं होता है।लेकिन इसके बाद भी प्रशासन कार्यवाही करने की जहमत नही उठा रहा वो भी ऐसे समय जब प्रदेश के मुखिया ने सख्ती से चेतवानी दी है ।

और वही एक तरफ सीहोर में अवैध कालोनियों पर एसडीएम आदित्य जैन स्वयं खड़े रहकर कार्यवाही कर रहे वही दूसरी आष्टा एसडीएम विजय मण्डलोई की इन अवैध कालोनियों पर नजर ही जाती आश्यर्च का विषय है या कहे साहब अपनी नजरे इन तक डालना नही चाहते।

खेर देखना होगा कि शहर में  डेढ़ दर्जन से ज्यादा अवैध कॉलोनी है उन पर कार्रवाई होती है या सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है क्योंकि सीहोर में दर्जनों कालोनियां हाईवे किनारे और शहर में काटी जा रही हैं।

और इन कॉलोनी मालिकों के झांसे में आने वाले भोलेभाले लोग कई बार प्रशासन को ज्ञापन भी सोप चुके है लेकिन मजाल है कि प्रशासन इन कालोनी मालिको पर कार्यवाही की हिम्मत कर सके।

वही दूसरी और नजर डाले तो प्रदेश में मिलावट खोरो पर जमकर कार्यवाही चल रही है और देखने को भी मिली है लेकिन आष्टा में मिलावट खोरो का धंधा किसी से छिपा नही है, आष्टा में त्योहार के समय मिलावट खोरो पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपाने वाला प्रशासन और खाद्य विभाग भी बड़े मिलावट खोरो पर कोई ठोस कार्यवाही नही करता जिसका खामियाजा आम जनता को अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर देना पड़ता है ।

क्या सिर्फ नंबर बढ़ाने के लिए ही छोटेमोटे दुकानदारो को किया जाता है परेशान

जब भी इस तरह की कार्यवाही प्रदेश या जिला मुख्यालय से शुरू होती है तो अफसर अपने नंबर बढ़ाने के लिये छोटे मोटे, फुटपाथ पर बैठने वाले दुकानदारो पर अपना रौब दिखाकर अपने नंबर बढ़ाता है लेकिन बड़े रसूखदारों के आगे इनका रोब कही दिखाई नही देता और यही हाल शनिवार को हुई कार्यवाही में देखने को मिला।

लेकिन हम तो यही कहेंगे साहब आप सरकारी अफसर है  आम जनता को नेताओ, जनप्रतिनिधियों से ज्यादा आप पर भरोसा होता है लेकिन आप लोग ही अपने पद का दुरुपयोग कर भेदभावपूर्ण कार्यवाही करेगे तो भोलीभाली जनता कहा जाएगी ?

खेर आप जनता को मूर्ख बनाये लेकिन मीडिया को मूर्ख नही समझे तो बेहतर है । और साहब यह पब्लिक है सब जानती है इसके सब्र का इम्तिहान ज्यादा मत लीजिए। 

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