विश्व मृदा दिवस - कृषि विज्ञान केन्द्र देवास में कार्यक्रम का आयोजन !
कृषकगण अपने खेतों में फसल अवशेष/नरवाई न जलाए
कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.के. दीक्षित ने मृदा स्वास्थ्य को बनाये एवं जीवित रखने हेतु समन्वित उर्वरक प्रबंधन/जैव विविधता पर जोर दिया तथा देशी, जैविक एवं रासायनिक खादों का सही मात्रा व आवश्यकतानुसार उपयोग करने संबंधी जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. निशिथ गुप्ता ने सब्जी एवं मसाला फसलों में किस प्रकार से समन्वित एवं संतुलित उर्वरक का उपयोग करें, मुख्य रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे-जिंक के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह ने फसल अवशेष/नरवाई न जलाने का संदेश देते हुए बेस्ट डीकम्पोजर व कैप्सूल का उपयोग कर मिट्टी में मिलाने संबंधी जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार ने कीटनाशक एवं फफूंदनाशक दवाओं का सही उपयोग करने संबंधी जानकारी दी जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित न हो और साथ ही साथ मानव जीवन प्रभावित न हो।
डॉ. सविता कुमारी ने मृदा स्वास्थ्य को बनाये रखने हेतु जैव उर्वरकों जैसे एजेटोबेक्टर, एजोस्पायलम, राइजोबियम, पीएसबी कल्चर, वर्मीकंपोस्ट आदि का उपयोग करने संबंधी जानकारी दी। अंकिता पाण्डेय ने सूचना संचार तकनीकी एवं कृषि विधेयक बिल के बारे में जानकारी दी कि किस प्रकार से किसान लाभान्वित हो सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के श्री संजय शर्मा, सॉलीडेरीडेड की नीतू चौहान एवं मैनकाइंड के श्री राजेन्द्र कुमार एवं विभिन्न गांवों के कुल 35 किसानों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में सॉलीडेरीडेड एवं मैनकाइंड स्वयं समाजसेवी संस्था ने सहभागिता की।


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