स्वच्छता के दावों को लगा झटका, बच्चों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधा...!
भारत सागर न्यूज/देवास। देवास जिले के शासकीय स्कूलों में वर्षों से बदहाल पड़े शौचालयों की मरम्मत को लेकर शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विशेष अभियान चलाया था। यूडाइस पोर्टल पर स्कूलों की भौतिक स्थिति के आंकड़ों के आधार पर जिलेभर के 252 स्कूलों में से 247 स्कूलों के शौचालय मरम्मत के लिए चिह्नित किए गए थे, जिनमें से अब तक मात्र 118 शौचालयों का कार्य ही पूर्ण हो पाया है।
शेष 129 शौचालयों की स्थिति अब भी जर्जर बनी हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक स्कूल को मरम्मत के लिए औसतन 20 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। यह कार्य जून माह में, स्कूल खुलने से पहले और वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पूर्व ही पूर्ण किया जाना था, लेकिन अभी तक कई स्थानों पर कार्य या तो शुरू ही नहीं हुआ है या अधर में लटका हुआ है।
बागली, खातेगांव और उदयनगर क्षेत्र के कई स्कूलों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। विशेष रूप से उदयनगर स्थित क्रिकेट ग्राउंड के पास के शासकीय मिडिल स्कूल में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालय की हालत बदतर है। कई जगह टाइल्स उखड़ चुकी हैं और गंदगी इतनी है कि वहाँ खड़े रहना भी मुश्किल हो जाता है। स्टूडेंट्स इन शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल परिसर में झाड़ियों के कारण सर्प और अन्य जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है।
बीआरसी कय्यूम खान (बागली) ने निरीक्षण के बाद बताया कि स्थिति गंभीर है और संबंधित संस्था प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। डीपीसी अजय मिश्रा ने बताया कि 118 शौचालयों में कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष मरम्मत कार्य अगले एक सप्ताह में पूर्ण करवा लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकारा कि काम की गति धीमी रही है, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है।
गौरतलब है कि जिले में कई शौचालय ऐसे भी हैं जिनकी मरम्मत 2016 के बाद से नहीं हुई थी। अब जब राशि स्वीकृत हुई है, तब भी कई स्कूलों में लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली के कारण बच्चे और स्टाफ को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग की मंशा शौचालयों को फिर से क्रियाशील कर बच्चों को स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण देना था, लेकिन जिम्मेदारों की सुस्ती से यह उद्देश्य अभी अधूरा है।



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