महाकाल की पांचवीं सवारी में उमड़ा भारी जनसैलाब, हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और हाईटेक रोबोट के शिवगान ने लूटी महफिल; मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रामघाट पर टेका माथा
भारत सागर न्यूज/उज्जैन। महाकाल की नगरी में भादौ मास के पहले सोमवार को निकली बाबा महाकाल की पांचवी सवारी ने शहरभर में गजब का उत्साह भर दिया। इस भव्य आयोजन के दौरान आसमान से हेलीकॉप्टर द्वारा की गई पुष्प वर्षा और रामघाट पर एक अत्याधुनिक रोबोट द्वारा किए गए शिवगान ने पूरे शहर की महफिल लूट ली। राजसी ठाठ-बाट के साथ निकले राजाधिराज के दीदार के लिए सड़कों पर ऐसा भारी जनसैलाब उमड़ा कि हर कोई शिवमय हो गया। इस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और रामघाट पर विधि-विधान से बाबा महाकाल का पूजन-अर्चन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि पालकी, हाथी और रथों पर सवार बाबा के विभिन्न स्वरूपों ने प्रजा को दर्शन दिए।
सवारी में शामिल हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि बाबा महाकाल की सवारी भव्यता के साथ निकल रही है और सावन-भादवा मास में उत्तर-दक्षिण संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक दृष्टि से महाकाल राजाधिराज हैं और काल के देवता हैं, जिनकी कृपा से उज्जैन की कीर्ति पूरी दुनिया में फैल रही है। सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद से उज्जैन के लोगों के जीवन में बड़े बदलाव आए हैं, जिससे आर्थिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से तरक्की हो रही है।
सवारी के दौरान तकनीक और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला जब रामघाट पर रोबोट ने शिव महिमा का बखान कर सभी को हैरान कर दिया। रोबोट संचालक ने बताया कि इस हाईटेक प्रयोग से भीड़ प्रबंधन को परखने में मदद मिली है। रोबोट ने पाताले हाटकेश्वरम, मृत्यु लोके महाकाल लिंग त्रय नमोस्तुते मंत्र का उद्घोष करते हुए महाकाल के स्वरूप का बखान किया और श्रद्धालुओं की यात्रा मंगलमय होने की कामना की, जिसका यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।
इस बार की सवारी को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए थे, जिसके तहत 11 सौ बटुकों ने वैदिक उद्घोष किया। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि महाकाल की सवारी में उमड़ने वाली अपार भीड़ को नियंत्रित करने और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए इस बार कई नए प्रयोग किए गए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। चौरासी महादेव की झांकियों, पारंपरिक लवाजमे और आधुनिक तकनीक के इस नायाब मेल ने उज्जैन की इस शाही सवारी को इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर कर दिया है।




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