श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर महाकाल की नगरी में गूंजेगा नंदा घर आनंद भयो, गोपाल मंदिर पर उमड़ी कान्हा के श्रृंगार की खरीदारों की भीड़
भारत सागर न्यूज/उज्जैन। भाद्रपद की पावन फुहारों के बीच महाकाल की इस धर्मधानी में बांके बिहारी के जन्मोत्सव का खुमार ऐसा छाया है कि शहर के हर नुक्कड़ पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। आगामी चार तारीख को आने वाले कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ जुट गई है और ऐतिहासिक गोपाल मंदिर के आसपास सजी दुकानों पर सुबह से ही पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है। हर कोई अपने लाडले लड्डू गोपाल को इस बार सबसे अलग और अलौकिक स्वरूप में सजाने के लिए बाजार की हर दुकान पर मोलभाव करने में जुटा नजर आ रहा है।
बाजारों में इस बार कान्हा के साजो-सामान की ऐसी बंपर रेंज उतरी है कि देखते ही बनता है। जयपुर मूर्ति मंदिर के संचालक आयुष मिश्रा ने। बताया कि महाकाल की नगरी में बाबा महाकाल के साथ-साथ कृष्ण भक्तों का भी जबरदस्त उत्साह रहता है, जिसके चलते आसपास के जिलों से भी लोग खरीदारी करने खिंचे चले आ रहे हैं। ग्राहकों की इसी भारी डिमांड को भुनाने के लिए हमारी दुकान पर सिल्क, ब्रोकेड और सिल्वर फैब्रिक के अलावा डायमंड और स्टोन वर्क वाले फैंसी वस्त्रों का खास स्टॉक सजा रखा है, जो देखते ही ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
आयुष मिश्रा ने आगे बताया कि भगवान के नख-शिख श्रृंगार के लिए सजे मुकुटों और आभूषणों की चमक से पूरा बाजार गुलजार हो गया है। भगवान को श्रृंगार बेहद प्रिय है, इसलिए इस बार सिर पर सजने वाले गोल्डन, सिल्वर और वेलवेट के डिजाइनर मुकुटों के साथ-साथ कुंडल, बांसुरी, मोती वाले कंगन और छन-छन करती पायों की जमकर खरीदारी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह महज त्योहारी कारोबार नहीं है, बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा और अपने आराध्य के प्रति समर्पण का एक ऐसा अनूठा उत्सव है जिसमें हर कोई अपनी ओर से बेस्ट देने की होड़ में लगा है।
जन्माष्टमी के इस उल्लास को और भी ज्यादा जीवंत बनाती है महर्षि सांदीपनी की यह ऐतिहासिक नगरी, जहाँ की अपनी एक अलौकिक परंपरा है। पंडित कीर्ति रूपम व्यास खुद अपने आराध्य के लिए विशेष खरीदारी करने बाजार पहुंची और उन्होंने बताया कि यह वही पवित्र भूमि है जहाँ कभी कृष्ण, बलराम और सुदामा ने एक साथ बैठकर सांदीपनी आश्रम में विद्या ग्रहण की थी, इसलिए यहाँ के कण-कण में कान्हा बसते हैं और यहाँ जन्मोत्सव का रोमांच देश भर से अलग होता है। इस बार आश्रम में विराजमान लड्डू गोपाल को खास रंग-नीले थीम वाली पोशाकों और मैचिंग आभूषणों से सजाया जाएगा, जो इस साल के उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है।




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